कन्या पूजन कैसे करें? अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन की सही विधि : कन्या पूजन में किन बातों का ध्यान रखें?

Navratri Kanya Pujan 2023:नवरात्रि की अष्टमी नवमी तिथि पर कन्या पूजन का  महत्व, जानिए पूजा विधि और नियम - Navratri 2023 Durga Ashtami Navmi Date  Shubh Muhurat Kanya Pujan Puja Vidhi Vidhi

नवरात्रि में कन्या पूजन (कंजक पूजन) को विशेष महत्व दिया जाता है। इसमें छोटी कन्याओं को देवी के स्वरूप के रूप में आमंत्रित करके उनका पूजन किया जाता है और भोजन कराया जाता है। कई घरों में कन्या पूजन अष्टमी को किया जाता है, जबकि कुछ परिवारों में नवमी को। दोनों परंपराएँ प्रचलित हैं। इसलिए आपके परिवार में जिस दिन कन्या पूजन की परंपरा चली आ रही है, उसी के अनुसार करना उचित माना जाता है।

कन्या पूजन कब करें—अष्टमी या नवमी?

अष्टमी और नवमी दोनों दिन कन्या पूजन किया जा सकता है।

  • यदि आपके घर में महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन की परंपरा है, तो अष्टमी को करें।

  • यदि आपके परिवार में महानवमी को नवरात्रि का समापन करके कन्या पूजन किया जाता है, तो नवमी को करें।

  • कई लोग अष्टमी या नवमी की तिथि, अपने स्थानीय पंचांग और पूजा के मुहूर्त के अनुसार निर्णय लेते हैं।

  • यदि किसी कारण से अष्टमी को कन्याएँ उपलब्ध न हों, तो नवमी को कन्या पूजन करना भी सामान्य धार्मिक परंपरा में स्वीकार किया जाता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा, स्वच्छता और सम्मान है। केवल दिन को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

कितनी कन्याओं को भोजन कराना चाहिए?

Kanya Pujan Niyam: कन्या पूजन में किन बातों का रखें ध्यान, जानें अष्टमी व नवमी  की तिथि, Astrology Hindi News - Hindustan

परंपरा के अनुसार सामान्यतः 2 से 9 वर्ष की कन्याओं को देवी के विभिन्न रूपों का प्रतीक माना जाता है। बहुत से घरों में 9 कन्याओं के साथ 1 बालक (लांगूर/बटुक) को भी भोजन कराया जाता है।

हालाँकि, 9 कन्याएँ मिलना आवश्यक नहीं है। यदि आपके पास 2, 5 या 7 कन्याएँ ही उपलब्ध हैं, तो श्रद्धापूर्वक उनका पूजन और भोजन कराया जा सकता है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार कन्याओं की संख्या रखना अधिक महत्वपूर्ण है, न कि संख्या को लेकर तनाव करना।

कन्या पूजन के लिए क्या-क्या सामग्री चाहिए?

कन्या पूजन के लिए बहुत अधिक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। सामान्यतः आप ये चीजें रख सकते हैं:

  • रोली या कुमकुम

  • अक्षत (चावल)

  • फूल

  • दीपक और धूप

  • जल

  • चुनरी, यदि देना चाहें

  • मौली/कलावा

  • फल

  • मिठाई

  • भोजन

  • दक्षिणा

  • कन्याओं के लिए छोटा-सा उपहार, अपनी इच्छा और सामर्थ्य के अनुसार

चुनरी, श्रृंगार सामग्री या उपहार देना अनिवार्य नहीं है। मुख्य भावना कन्याओं को सम्मानपूर्वक देवी का स्वरूप मानकर सत्कार करना है।

  1. क्या नहीं खिलाना चाहिए?

    कन्या पूजन में भोजन सात्त्विक और स्वच्छ रखना उचित माना जाता है। सामान्यतः इन चीजों से बचा जाता है:

    • मांसाहारी भोजन

    • अंडा

    • शराब या नशीले पदार्थ

    • बहुत अधिक तामसिक भोजन

    • बासी भोजन

    • ऐसा भोजन जो लंबे समय से रखा हुआ हो या खराब हो गया हो

    नवरात्रि के व्रत के नियमों का पालन करने वाले परिवार अपनी परंपरा के अनुसार भोजन तैयार करते हैं। इसलिए यदि आपके घर में किसी विशेष प्रकार का भोजन वर्जित है, तो उसे न रखें।

    कन्या पूजन की विधि

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    कन्या पूजन बहुत सरल तरीके से किया जा सकता है।

    1. घर की सफाई करें

    कन्या पूजन वाले दिन पूजा स्थल और घर को साफ रखें। स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। पूजा के स्थान पर माता दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति के सामने दीपक जलाएँ।

    2. कन्याओं को सम्मानपूर्वक बुलाएँ

    कन्याओं को घर पर आमंत्रित करें। उन्हें केवल भोजन कराने के लिए नहीं, बल्कि सम्मानपूर्वक देवी स्वरूप मानकर बुलाया जाता है।

    3. कन्याओं के पैर धोएँ

    परंपरा के अनुसार कन्याओं के पैर स्वच्छ जल से धोकर उन्हें आसन पर बैठाया जाता है। यदि किसी कारण से पैर धोना संभव न हो, तो केवल हाथ जोड़कर उनका स्वागत और तिलक करना भी किया जा सकता है।

    4. तिलक करें

    कन्याओं के माथे पर रोली या कुमकुम का तिलक लगाएँ और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद फूल अर्पित करें।

    5. भोजन कराएँ

    कन्याओं को प्रेमपूर्वक भोजन परोसें। पारंपरिक रूप से पूरी, हलवा और काले चने का भोग कराया जाता है।

    भोजन कराते समय यह ध्यान रखें कि बच्चियों की पसंद, उम्र और स्वास्थ्य का भी सम्मान किया जाए। किसी बच्ची को कोई भोजन पसंद न हो या वह कुछ खाना न चाहती हो, तो उस पर दबाव न डालें।

    6. दक्षिणा और उपहार दें

    भोजन के बाद अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार कन्याओं को दक्षिणा दें। साथ में फल, मिठाई, स्टेशनरी, कपड़े या कोई उपयोगी छोटी वस्तु भी दी जा सकती है।

    7. आशीर्वाद लें

    अंत में कन्याओं को प्रणाम करके उनका आशीर्वाद लें। इसके बाद उन्हें सम्मानपूर्वक विदा करें।

    क्या कन्या पूजन में लड़के को भी खिलाना चाहिए?

    कई परिवारों में कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को भी भोजन कराया जाता है। इसे अलग-अलग क्षेत्रों में लांगूर, बटुक या भैरव स्वरूप जैसी परंपराओं से जोड़ा जाता है।

    लेकिन लड़के को खिलाना अनिवार्य है या नहीं, यह आपके परिवार और क्षेत्र की धार्मिक परंपरा पर निर्भर करता है। यदि केवल कन्याएँ उपलब्ध हैं, तो केवल कन्याओं का पूजन करके भी नवरात्रि की पूजा की जा सकती है।

    कन्या पूजन में किन बातों का ध्यान रखें?

    सबसे जरूरी बात यह है कि कन्याओं को सम्मान और प्रेम दिया जाए। उन्हें केवल धार्मिक रस्म के रूप में न देखें, बल्कि घर आए बच्चों की तरह उनकी सुविधा का ध्यान रखें।

    • भोजन ताजा और साफ होना चाहिए।

    • बच्चों को जबरदस्ती भोजन न कराएँ।

    • उनकी पसंद और एलर्जी जैसी बातों का ध्यान रखें।

    • बहुत अधिक दिखावा करने की आवश्यकता नहीं है।

    • अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार ही प्रसाद और उपहार रखें।

    • कन्याओं का सम्मान केवल पूजन के समय ही नहीं, बल्कि सामान्य जीवन में भी करना चाहिए।

    कन्या पूजन नवरात्रि की एक सुंदर परंपरा है, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी के स्वरूप के रूप में सम्मान दिया जाता है। अष्टमी और नवमी दोनों अवसरों पर कन्या पूजन की परंपरा मिलती है। इसलिए आपके परिवार में जिस दिन यह परंपरा चली आ रही है, उस दिन श्रद्धापूर्वक कन्या पूजन कर सकते हैं।

    कन्याओं को हलवा, पूरी और काले चने खिलाना सबसे सामान्य परंपरा है। इसके अलावा फल, खीर या अन्य सात्त्विक भोजन भी अपनी सुविधा के अनुसार दिया जा सकता है। कन्या पूजन में सबसे बड़ा महत्व भोजन या उपहार की कीमत का नहीं, बल्कि श्रद्धा, स्वच्छता, प्रेम और कन्याओं के सम्मान का है।

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