प्रयागराज में वकील की गोली मारकर हत्या मौत के बदले मौत चाहिए;
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प्रयागराज में 52 साल के वकील की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पेट में गोली लगते ही वह खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़े। उन्हें SRN अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पत्नी वर्षा ने बताया कि पुलिस के सामने मेरे पति सतीश श्रीवास्तव को गोली मारी गई है। आरोपियों का एनकाउंटर होना चाहिए। मुझे खून का बदला खून और मौत का बदला मौत चाहिए। वहीं, वकील की हत्या के बाद 4 घंटे तक उनके घरवालों ने कार्रवाई को लेकर हंगामा किया।
डीसीपी सिटी सागर जैन के आश्वासन के बाद घरवाले शांत हुए और शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी देवेंद्र नाथ भी वकील है। हमलावरों का एक सीसीटीवी भी सामने आया है। इसमें सभी मुंह बांधे हुए जाते दिख रहे हैं। घटना कर्नलगंज थाना क्षेत्र की गुरुवार सुबह 12 बजे की है।
वर्षा श्रीवास्तव ने बताया- देवेंद्रनाथ मिश्रा पिछले एक साल से हमारी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। इस मामले में हमने सीएम योगी, डीसीपी और एसीपी समेत कई अधिकारियों को प्रार्थना पत्र भी दिया था।
10 दिसंबर को मेरी बेटी के साथ भी उन लोगों ने घटना की थी। हम गोरखपुर गए थे और योगीजी से मिले थे। उन्होंने हमें सांत्वना दी थी और कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। लेकिन, एसीपी विवेक यादव आरोपियों का साथ दे रहे थे।
हमलावर घर में घुसकर तोड़फोड़ कर रहे थे

आज मेरे पति, मैं और मेरी बेटियां कॉलेज में थे। घर पर ताला लगा था। दोपहर करीब 12 बजे मेरे पति का मेरे पास फोन आया। उन्होंने कहा कि सलोरी वाले मकान में देवेंद्रनाथ मिश्रा कई लोगों को लेकर घुस गया है। जल्दी पहुंचो, हम भी पहुंच रहे हैं।
हम लोग दौड़ते हुए अपने घर पहुंचे। हमने देखा कि करीब 20 लोगों के साथ देवेंद्रनाथ हमारे मकान में तोड़फोड़ कर रहा है। घर के पीछे प्लॉट की बाउंड्री तोड़ दी है। हम लोगों ने विरोध किया। इस पर उसने मेरे पति को धक्का दे दिया। फिर लोहे की रॉड से उन पर हमला कर दिया।
उसके साथ उसका बेटा निपेंद्रनाथ मिश्रा उर्फ बच्चू, अमरेंद्रनाथ मिश्रा उर्फ अनुपम समेत 7-8 लोग थे। देवेंद्रनाथ की पत्नी भी थी। इन सभी ने हम लोगों पर पथराव कर दिया। मुझे जमीन पर गिरा दिया। लात-घूसों से मारा। कुर्सी से हमला किया।
इसके बाद अमरेंद्रनाथ ने रिवॉल्वर निकाल ली। उसने मेरे पति के पेट में गोली मार दी। चौकी इंचार्ज विनय यादव ने भी मेरे पति के साथ मारपीट की। मैं चाहती हूं कि आरोपियों पर एफआईआर हो, उनका एनकाउंटर किया जाए।
वर्षा ने बताया- जमीन हमारी है। सभी कागज मेरे पास हैं। देवेंद्रनाथ ने कहा था कि मुझे गाड़ी खड़ी करने के लिए जगह दे दो। 50 साल का दोस्ताना था, इसलिए मेरे पति ने उसे गाड़ी खड़ी करने की परमिशन दे दी। 2 साल तक वह गाड़ी खड़ी करता रहा। इसके बाद देवेंद्रनाथ ने जमीन पर कब्जा करना शुरू कर दिया। झगड़ा बढ़ा, तो हम लोग पुलिस और कोर्ट गए। मुझे क्या पता था कि यह बिच्छू बन जाएगा?
दूसरी ओर, सतीश श्रीवास्तव की हत्या की खबर मिलते ही उनके साथी वकील और घरवाले मौके पर पहुंच गए। वे लोग सतीश की बॉडी लेकर अस्पताल से निकले। कहने लगे कि जब तक आरोपियों का एनकाउंटर नहीं होगा, शव का अंतिम संस्कार नहीं होगा। सूचना मिलते ही डीसीपी यमुनानगर विवेकचंद्र यादव और डीसीपी सिटी सागर जैन मौके पर पहुंचे। उन्होंने घरवालों को समझाया।
इसी बीच पुलिस अफसरों की वकीलों और घरवालों से नोकझोंक भी हो गई। सतीश की बेटी वैशाली ने डीसीपी से कहा- हम लोग जब आपके पास शिकायत लेकर गए थे, तब आपने डांट कर भगा दिया था। चौकी प्रभारी के सामने मेरे पिता को गोली मारी गई है। हमलावर मेरे घर के ऊपर चढ़े थे।
करीब 4 घंटे तक घरवाले शव को लेकर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। बाद में पुलिस अफसरों से कार्रवाई का आश्वासन मिलने पर वे लोग शांत हुए।
डीसीपी सिटी सागर जैन ने बताया- देवेंद्रनाथ मिश्रा और सतीश श्रीवास्तव के बीच नजूल की संपत्ति को लेकर पहले से झगड़ा चल रहा था। देवेंद्रनाथ अपर शासकीय अधिवक्ता (AGA) हैं। गुरुवार करीब 11:45 बजे देवेंद्रनाथ विवादित संपत्ति पर पहुंचा।
वहां सतीश श्रीवास्तव की ओर से पहले से लगाया गया ताला तोड़ दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच झगड़ा हो गया। इस दौरान देवेंद्रनाथ मिश्रा की ओर से फायरिंग की गई। इसमें एक गोली सतीश श्रीवास्तव के पेट में लग गई। वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
घरवाले उन्हें राज नर्सिंग होम लेकर पहुंचे। वहां उनकी गंभीर हालत को देखते हुए स्वरूप रानी नेहरू (SRN) अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सतीश के घरवालों की शिकायत पर थाना कर्नलगंज में मुकदमा दर्ज किया गया है। घटना में शामिल कुछ आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
अन्य आरोपियों की तलाश के लिए 3 पुलिस टीमें बनाई गई हैं। आसपास लगे CCTV की फुटेज भी खंगाली जा रही है। मुकदमा दर्ज होने के बाद जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनकी गिरफ्तारी की जाएगी।

