कैसे प्रोटेस्ट का चेहरा बनीं नेहा बोरा ?

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की पीएचडी छात्रा 29 वर्षीय नेहा बोरा हाल के प्रमुख छात्र और युवा आंदोलनों में एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरी हैं।
- थिएटर और छात्र राजनीति से शुरुआत: नेहा उत्तराखंड की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन, आंबेडकर यूनिवर्सिटी से एमए किया और वर्तमान में JNU से पीएचडी कर रही हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान वह एक थिएटर ग्रुप से जुड़ीं, जिसने उनकी राजनीतिक समझ को आकार दिया। 2019-2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों ने उनके राजनीतिक सफर को नई दिशा दी
- नीट पेपर लीक और भूख हड़ताल: गर्मियों में शिक्षा सुधारों और नीट पेपर लीक के मामलों के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के समर्थन में जंतर-मंतर पर 23 दिनों की भूख हड़ताल और उनके कड़े तेवरों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
- झारखंड और अन्य प्रदर्शन: वह रांची में झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) की परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों में भी शामिल हुईं, जहां उनके चेहरे पर स्याही फेंकी गई थी, पर उन्होंने डटकर उसका सामना किया
- मुख्य चुनाव आयुक्त और जंतर-मंतर 2.0 प्रोटेस्ट: हाल ही में दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में वह केंद्र में रहीं। पुलिस बैरिकेड्स पर चढ़ना, अधिकारियों को चकमा देकर कनॉट प्लेस तक दौड़ लगाना और हिरासत में लिए जाने के बावजूद निडर होकर नारे लगाने के उनके वीडियो सोशल मीडिया पर ‘शेरनी’ के रूप में खूब वायरल हुए
वैचारिक पृष्ठभूमि: उनके परिवार के बीजेपी समर्थक होने के बावजूद, वह वामपंथी राजनीति और छात्र अधिकारों के संघर्ष से जुड़ी हुई हैं और राहुल गांधी जैसे नेताओं के साथ भी मंच साझा करती नजर आई हैं।

