रहने के लिए जगह चुनते समय 4 बातें ध्यान रखनी चाहिए
यह नीति सिर्फ रहने की जगह बदलने की सलाह नहीं देती, बल्कि यह समझाती है कि एक सुखी और सफल जीवन के लिए व्यक्ति के आसपास का वातावरण कैसा होना चाहिए। सम्मान का अर्थ केवल पद, प्रतिष्ठा या धन से मिलने वाला सम्मान नहीं है। इसका अर्थ यह है कि समाज और आसपास के लोग आपकी योग्यता और व्यक्तित्व को महत्व दें। जिस जगह पर हमें बार-बार अपमान या उपेक्षा का सामना करना पड़ता है, वहां लंबे समय तक रहना सही नहीं है। ऐसी जगह पर रहने से हमारा आत्मविश्वास कमजोर होता है। ऐसा वातावरण शांति भी छीन सकता है। जहां हमारी योग्यता और व्यक्तित्व का कोई मूल्य न हो, वहां केवल मोह या मजबूरी के कारण नहीं ठहरना चाहिए।
- जहां कमाई का साधन न हो, वहां न रहें
जीवन चलाने के लिए भोजन, आवास और अन्य जरूरी चीजें चाहिए। इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आय का मजबूत साधन चाहिए। अगर किसी जगह पर व्यक्ति के लिए रोजगार, व्यवसाय या अपनी योग्यता के अनुसार कमाई का कोई अवसर ही नहीं है, तो वहां रहने से जीवन में परेशानियां हमेशा बनी रहेंगी। व्यक्ति को रहने के लिए ऐसे स्थान की तलाश करनी चाहिए, जहां मेहनत और योग्यता का उचित इस्तेमाल किया जा सके और धन कमाया जा सके।
व्यक्ति सामाजिक प्राणी है। हमें जीवन में ऐसे लोगों की आवश्यकता होती है, जिनसे हम अपने सुख-दुख साझा कर सके और जरूरत पड़ने पर मदद ले सके। भाई-बन्धु का अर्थ केवल रक्त संबंधियों से नहीं, बल्कि ऐसे भरोसेमंद लोगों से भी है जो कठिन समय में हमारे साथ खड़े रहते हैं।
- जहां विद्या और सीखने के अवसर न हों, वहां न रहें
जिस स्थान पर सीखने, ज्ञान प्राप्त करने और अपनी क्षमताओं को विकसित करने के अवसर न हों, वहां रहकर हमारे विकास की गति रुक सकती है। विद्या केवल स्कूल या कॉलेज की शिक्षा तक सीमित नहीं है। नई तकनीक सीखना, अच्छे लोगों से ज्ञान प्राप्त करना, अनुभव हासिल करना और अपनी योग्यता को लगातार बेहतर बनाना भी विद्या का ही हिस्सा है। हमें ऐसी जगह का चयन करना चाहिए, जहां हम खुद को बेहतर बनाने के लिए नई-नई बातें सीख सकते हैं।
आचार्य चाणक्य का जन्म करीब 375 ईसा पूर्व माना जाता है। वे कुशल राजनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री, शिक्षक और कूटनीतिज्ञ थे। उन्हें कौटिल्य और विष्णु गुप्त के नाम से भी जाना जाता है। चाणक्य ने चंद्रगुप्त को अपनी नीतियों के बल पर सम्राट बना दिया था। उन्होंने कौटिल्य का अर्थशास्त्र और चाणक्य नीति जैसे ग्रंथों की रचना की थी।

