15 से ज्यादा बार फेल, कानपुर के मोहित सचान ने क्रैक किया UPSC CAPF
15 से ज्यादा परीक्षाओं में असफल होने के बाद भी भारतीय नेवी के पूर्व सेलर मयंक सचान ने हिम्मत नहीं हारी सरकारी नौकरी में 2-3 असफलताओं से युवा डिप्रेशन में चले जाते हैं. लेकिन मयंक सचान की कहानी अलग है. वह 15 से ज्यादा बार फेल हुए, 2 बार SSB इंटरव्यू में नाकामी झेली और CAPF की परीक्षा में भी 2 बार मुंह की खाई. इसके बावजूद उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा.
कानपुर के साधारण परिवार में पले-बढ़े मयंक सचान के लिए रास्ते कभी भी आसान नहीं थे. उनके पिता एक प्राइवेट फैक्ट्री में इलेक्ट्रीशियन थे. घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि इंजीनियरिंग जैसी महंगी पढ़ाई का खर्च उठाया जा सके. घर में 2 भाई-बहनों की जिम्मेदारी के बीच मयंक सचान ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सरकारी स्कूल से की. परिवार की आर्थिक स्थिति को संभालने और देश सेवा का जज्बा पूरा करने के लिए मयंक सचान ने कम उम्र में ही भारतीय नौसेना जॉइन कर ली. नेवी में बतौर नाविक (Sailor) ड्यूटी निभाते हुए भी मयंक ने अपने अंदर के छात्र को मरने नहीं दिया. उन्होंने सरकारी नौकरी के साथ-साथ पढ़ाई जारी रखी और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन किया
नौसेना की नौकरी के साथ वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे. लेकिन असफलताएं उनका पीछा नहीं छोड़ रही थीं. वह 15 से ज्यादा कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स में फेल हुए. सेना में रहते हुए अफसर बनने के लिए 2 बार SSB इंटरव्यू दिए- एक बार CDS के जरिए और फिर डायरेक्ट कमीशन के लिए.. लेकिन दोनों बार फेल हो गए. इसके बाद सिविल सेवा की प्रीलिम्स परीक्षा में फेल हो गए. यही नहीं, UPSC CAPF की लिखित परीक्षा में भी उन्हें शुरुआती 2 प्रयासों में असफलता ही हाथ लगी.
अनुशासन ने सिखाई असली कला
लगातार फेल होने पर लोगों का कॉन्फिडेंस टूटने लगता है. लेकिन नेवी के माहौल ने उन्हें दबाव की स्थिति में भी कूल रहना सिखाया. उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमियों पर काम किया और तीसरी बार सीएपीएफ के मैदान में उतरे. इस बार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने AIR 343 के साथ यूपीएससी सीएपीएफ 2025 परीक्षा क्रैक कर ली.


