‘पिता के बनाए घर में बेटे-बहू का हक नहीं , अहमदाबाद की सिविल कोर्ट ने सुनाया फैसला

पिता के बनाए घर पर बेटे-बहू का हक नहीं', अहमदाबाद सिविल कोर्ट का बड़ा फैसला  | No Right Of Son And Daughter In Law In Father Self Earned House Ahmedabad  Civil Court

अहमदाबाद के एक बुजुर्ग व्यक्ति ने अपने ही बेटे और बहू के खिलाफ 2013 में मुकदमा दायर किया था। इस मामले में अब फैसला 13 साल बाद बुजुर्ग व्यक्ति के पक्ष में आया है।

क्या है मामला  
बुजुर्ग व्यक्ति के बेटे और बहू की शादी 2002 में हुई थी। वे घर के ग्राउंड फ्लोर पर रहते हैं और बुजुर्ग व्यक्ति पहली मंजिल पर रहते हैं। बहू के साथ में उसकी बेटी भी रहती है।
पति-पत्नी के बीच झगड़ों के कारण वे अलग-अलग कमरों में रहने लगे, जिसके बाद बेटे ने कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की। बुजुर्ग व्यक्ति ने बेटे-बहू के झगड़ों से तंग आकर 2013 में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अदालत से बेटे-बहू को घर से निकालने का अधिकार मांगा।

बुजुर्ग व्यक्ति ने मुकदमा दाखिल करते वक्त बताया कि उन्होंने यह प्रॉपर्टी 1980 के दशक में अपनी खुद की कमाई से खरीदी थी और वे ही इसके एकमात्र मालिक हैं।

बुजुर्ग व्यक्ति ने दावा किया कि बार-बार कहने के बावजूद, उनके बेटे और बहू ने घर खाली करने से इनकार कर दिया और प्रॉपर्टी पर अपना अधिकार जताया।

बुजुर्ग के बेटे ने मुकदमे का विरोध नहीं किया, लेकिन बहू ने आरोप लगाया कि यह मामला उसके पति की मिलीभगत से दायर किया गया था ताकि उनके चल रहे वैवाहिक विवाद के संबंध में उस पर दबाव बनाया जा सके।

बहू ने यह भी आरोप लगाया कि उसका पति तलाक चाहता था क्योंकि उसका किसी दूसरी महिला के साथ संबंध था। यह तर्क देते हुए कि यह घर उसका वैवाहिक घर है, उसने वहां रहने का अधिकार जताया क्योंकि यह एक ‘साझा घर’ था।

बहू ने कोर्ट से कहा कि वह अपनी बेटी के साथ एक कमरे में रह रही है और DV एक्ट के प्रावधानों के तहत उसे घर से नहीं निकाला जा सकता।

पिता को बेटे-बहू को घर से बाहर करने का अधिकार', 13 साल की लड़ाई पर सिविल  कोर्ट ने सुनाया फैसला - News18 हिंदी

घर पर बुजुर्ग व्यक्ति अधिकार

सिटी सिविल जज वी.ए. धाधल ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद कहा कि दस्तावेजी सबूतों से साबित होता है कि प्रॉपर्टी पर उस बुज़ुर्ग व्यक्ति का ही मालिकाना हक था और यह भी पता चलता है कि इसे खरीदने में उनके बेटे या बहू का कोई योगदान नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए, कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, ‘सास-ससुर की अपनी निजी प्रॉपर्टी को बहू के लिए ‘साझा घर’ नहीं माना जा सकता। इसलिए, घरेलू हिंसा से जुड़े कानूनों के तहत उसे ऐसी प्रॉपर्टी में रहने का अधिकार नहीं है।’

कोर्ट ने साफ किया कि घर से बेदखल करने का यह आदेश कपल की बेटी पर लागू नहीं होगा, जो अब बालिग हो चुकी है, क्योंकि दादा ने उसके खिलाफ कोई राहत नहीं मांगी थी।

 

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