Make in India के 12 साल दुनिया मान रही लोहा
देश में बड़े स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए लाई गई ‘मेक इन इंडिया’ स्कीम को शुक्रवार को 12 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस योजना को 25 सितंबर, 2014 को लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य देश को मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन और इनोवेशन में ग्लोबल बनाना है।

इस योजना के आने के बाद से देश के कई सेक्टर में बड़ा बदलाव आया है। इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में उत्पादन कई गुना बढ़ गया है। वहीं, ऑटोमोबाइल और कैपिटल गुड्स जैसे क्षेत्रों में उत्पादन में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है।
देश का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 के 1.9 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले सात गुना बढ़कर 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसमें मोबाइन फोन उत्पादन करीब 32 गुना बढ़कर 6.3 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो कि पहले 18,900 करोड़ रुपये था। अब वॉल्यूम के हिसाब से देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरर बना गया है
दोपहिया वाहनों का उत्पादन 30 प्रतिशत और तिपहिया वाहनों का उत्पादन 71 प्रतिशत बढ़ा है। इसके अलावा, भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया में तीसरे और वैल्यू के हिसाब से 11वें स्थान पर है।
भारतीय रेलवे ने 2014-24 के दौरान 54,809 कोच बनाए। रेलवे कोच का औसत सालाना उत्पादन 2004-14 के दौरान 3,300 से कम था, जो 2014-24 में बढ़कर 5,481 हो गया। घरेलू उत्पादन में लोकोमोटिव और आधुनिक यात्री कोच भी शामिल हैं।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत न केवल अपनी जरूरतों के लिए विनिर्माण कर रहा है, बल्कि दुनिया के लिए भी उत्पाद तैयार कर रहा है। गोयल ने कहा, “यह सिर्फ एक उपलब्धि नहीं है। यह हमें याद दिलाती है कि जब कोई देश अपनी क्षमताओं पर विश्वास करता है और सरकार निरंतर सुधारों और ठोस कदमों के जरिए उस विश्वास को मजबूती देती है, तो क्या कुछ हासिल किया जा सकता है। 2014 को पीछे मुड़कर देखें तो भारत की विनिर्माण क्षमता को लेकर होने वाली बहसें याद आ सकती हैं। उस समय भारत में इस्तेमाल होने वाले कई उत्पाद आयात किए जाते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे हमारी नियति मानने से इनकार कर दिया।”

